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जब कमजोरी ही ताकत बन जाए तो कोई हरा नहीं सकता

कहते हैं चलती का नाम ही जिन्दगी होता है और जहां जिन्दगी की रफ्तार धीमी पड़ जाए तो वहां ठहराव के हालात कुछ ऐसे अपनी जड़े जमा लेते हैं कि फिर से उस जिन्दगी को पटरी पर लाना वाकई बहुत मुश्किल हो जाता है. जीने के लिए हिम्मत, जज्बे और हौसले की बहुत जरूरत होती है लेकिन कई बार जिन्दगी में ऐसे पड़ाव आते हैं जब ये तीनों शब्द बेमानी बनकर अपना महत्व खो देते हैं. नकारात्मक परिस्थितियों से हारकर बैठ जाना जिंदगी जीने का तरीका तो नहीं है लेकिन सच यही है कि कोई भी आम इंसान प्रतिकूल परिस्थितियों में ऐसा ही करेगा. वह अपनी हिम्मत हारकर बैठ जाएगा और उसके साथ जो भी हुआ उसके लिए अपनी तकदीर को ही दोष देगा. लेकिन जिस तरह हाथ की पांचों अंगुलियां बराबर नहीं होतीं कुछ वैसे ही प्रत्येक इंसान की सोच और तरीका अलग होता है. कोई हार को अपनी नियती बना लेता है तो कोई उस हार को जीत में बदलने का हौसला लिए आगे निकल पड़ता है और उसके इस जज्बे के लिए तकदीर भी उसे जीत का तोहफा देने के लिए मजबूर हो जाती है.   आज हम आपको कुछ ऐसी ही शख्सियतों से मिलवाने जा रहे हैं जिनके जीवन में आए तुफान ने उनकी दुनिया उजाड़ दी लेकिन फिर भी उ...
बहुत समय पहले की बात है ,किसी गाँव में एक किसान रहता था . वह रोज़ भोर में उठकर दूर झरनों से स्वच्छ पानी लेने जाया करता था . इसकाम के लिए वह अपने साथ दो बड़े घड़े ले जाता था , जिन्हें वो डंडे में बाँध कर अपने कंधे पर दोनों ओर लटका लेता था .  उनमे से एक घड़ा कहीं से फूटा हुआ था, और दूसरा एक दम सही था . इस वजह से रोज़ घर पहुँचते -पहुचते किसान के पास डेढ़ घड़ा पानी ही बच पाता था .ऐसा दो सालों से चल रहा था .  सही घड़े को इस बात का घमंड था कि वो पूरा का पूरा पानी घर पहुंचता है और उसके अन्दर कोई कमी नहीं है, वहीँ दूसरी तरफ फूटा घड़ा इस बात से शर्मिंदा रहता था कि वो आधा पानी ही घर तक पंहुचा पाता है और किसान की मेहनत बेकार चली जाती है . फूटा घड़ा ये सब सोच कर बहुत परेशान रहने लगा और एक दिन उससे रहा नहीं गया ,  उसने किसान से कहा , “ मैं खुद पर शर्मिंदा हूँ और आपसे क्षमा मांगना चाहता हूँ?”  “क्यों ? “ , किसान ने पूछा , “ तुम किस बात से शर्मिंदा हो ?”  “शायद आप नहीं जानते पर मैं एक जगह से फूटा हुआ हूँ , और पिछले दो सालों से मुझे जितना पानी घर पहुँचाना ...